अपरिमेय संख्याओं का पुनर्भ्रमन, परिमेय संख्या

[इस चैप्टर को पढ़ने से पहले आपको ध्यान से परिमेय संख्या और अपरिमेय संख्या के बारे में जान लेना चाहिए । अगर परिमेय और अपरिमेय संख्या अच्छी तरह से जान लेंगे तो  ये चैप्टर आसान हो जाएगा ।]
चलिये सबसे पहले परिमेय और अपरिमेय संख्या के बारे में जान लेते हैं। संख्या को दो कैटेगरी में रख सकते हैं एक परिमेय और दूसरा अपरिमेय।

1.परिमेय संख्या :- 

वैसी संख्या जो p/q के रूप में लिखा जा सके और q=0 ना हो , ऐसी संख्या को परिमेय संख्या कहते हैं। 

जैसे :-
0 ,1,2,5,-5,-10,3/4 etc

  • 0 एक परिमेय संख्या है क्योकि 0 को 0 /1 लिखा जा सकता है।
  • 1 एक परिमेय संख्या है क्योकि 1 को 1 /1 लिखा जा सकता है।
  • 2 एक परिमेय संख्या है क्योकि 2 को 2/1 लिखा जा सकता है।
  • 5 एक परिमेय संख्या है क्योकि 5 को 5 /1 लिखा जा सकता है।
  • -5 एक परिमेय संख्या है क्योकि -5 को -5 /1 लिखा जा सकता है।
  • -10 एक परिमेय संख्या है क्योकि -10 को -10/1 लिखा जा सकता है।
  • 3/4 एक परिमेय संख्या है 3/4 संख्या p/q के रूप में है।
जैसे 8/0 परिमेय संख्या नहीं होगा क्योंकि 8/0 को p/q के रूप में लिखा जा सकता है । लेकिन यहाँ q=0 है ।

2.अपरिमेय संख्या :- 

इसका आसन सा परिभाषा है । वैसी संख्या जो परिमेय संख्या नहीं हो वैसे अपरिमेय संख्या  कहते हैं । लेकिन इससे समझ में नहीं आता है कि अपरिमेय संख्या होता क्या है ?
वैसी संख्या जिसे p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता है उसे अपरिमेय संख्या कहा जाता है ।
जैसे :- √2,√3,√5,√15,π, -√2/√3, 0.10110111011110.. etc
इस चैप्टर में सिर्फ सिद्ध करने वाला सवाल आएगा । जैसे √2  अपरिमेय संख्या है सिद्ध कीजिये । इसी तरह का सवाल आएगा । प्रश्नावली 1.3 को अगले आर्टिकल में हल किया गया है । आप उसे देखिए ।

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